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सऊदी अरब में फंसे 161 भारतीय श्रमिक, सैय्यद आबिद हुसैन ने विदेश मंत्रालय से लगाई मदद की गुहार

अंबेडकरनगर:सऊदी अरब के अबहा शहर में करीब 161 भारतीय श्रमिक गंभीर संकट में फंसे हुए हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले के कई युवक भी शामिल हैं। रोजगार के नाम पर विदेश भेजे गए इन श्रमिकों को बीते तीन महीनों से न तो वेतन मिला है और न ही खाने-पीने की समुचित व्यवस्था।
अंबेडकरनगर के ग्राम रुद्रपुर भगाही निवासी सैयद आबिद हुसैन ने इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय और सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास से सभी श्रमिकों की सुरक्षित वतन वापसी की मांग की है। आबिद हुसैन ने इस संबंध में एक वीडियो जारी कर मजदूरों की व्यथा देश के सामने रखी है।
सैयद आबिद हुसैन के अनुसार, जिले के ग्राम अमिया निवासी एक परिवार ने उनसे संपर्क कर बताया कि उनके परिजन सऊदी अरब में फंसे हुए हैं। इसके बाद आबिद ने वहां मौजूद संतोष कुमार और हिरदेश कुमार सहित अन्य श्रमिकों से संपर्क कराया। बातचीत में मजदूरों ने बताया कि कंपनी ने उन्हें न तो काम दिया और न ही भारत लौटने की अनुमति।
श्रमिकों का कहना है कि वे तीन महीने से बेहद खराब हालात में जीवन यापन कर रहे हैं। कई बार एक वक्त का भोजन भी नसीब नहीं हो पा रहा है। मजबूरी में उनके परिजन भारत से पैसे भेज रहे हैं, जिससे किसी तरह गुजारा हो रहा है।
सैयद आबिद हुसैन ने बताया कि उन्होंने कई श्रमिकों के दस्तावेज एकत्र कर भारतीय विदेश मंत्रालय और जेद्दा स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास को पत्र भेजा है। इसके साथ ही श्रमिकों द्वारा भेजे गए वीडियो भी संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें उनकी पीड़ा साफ झलक रही है।


आबिद का कहना है कि यह मामला केवल रोजगार का नहीं बल्कि मानवीय संकट का है और सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर सभी भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाना चाहिए।
सैयद आबिद हुसैन पिछले 10–12 वर्षों से विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों की मदद कर रहे हैं। अब तक वे हजारों भारतीयों की वतन वापसी में अहम भूमिका निभा चुके हैं। उनकी इसी सामाजिक सेवा के चलते लोग उन्हें ‘रियल लाइफ बजरंगी भाईजान’ भी कहते हैं।
पेशे से वॉल डिजाइनर और स्पेशल इफेक्ट पेंटर सैयद आबिद भारत में लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराते हैं। विदेशों में फंसे भारतीयों की मदद के लिए उन्हें कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।
अब देखना यह है कि 161 भारतीय श्रमिकों की इस पुकार पर सरकार और दूतावास कब तक ठोस कदम उठाते हैं, ताकि ये लोग सुरक्षित अपने घर लौट सकें।